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National Sports Day 2025: आज ही के दिन जन्‍मा था 'हॉकी का जादूगर', देशभक्ति ऐसी कि ठुकराया हिटलर का ऑफर_我的网站

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一 |     9월 11일까지 구민 누구나 참여…균형발전·상생복지 등 6대 분야 대상조사 결과 실행계획·핵심 추진사업 선정에 반영                   김경호 광진구청장. 광진구청 제공서울 광진구는 민선9기 공약사업에 대한 주민 의견을 수렴하기 위해 다음 달 11일까지 온라인 설문조사를 실시한다고 26일 밝혔다.이번 설문조사는 민선9기 공약사업을 구민에게 알리고 주민들의 관심과 정책 수요를 파악해 공약 추진 방향과 우선순위를 정하기 위해 마련됐다. 광진구민이면 누구나 광진구청 홈페이지를 통해 참여할 수 있다.설문은 민선9기 공약사업의 6대 핵심 분야인 △균형발전 △상생복지 △경제활력 △문화교육 △안전환경 △열린소통 가운데 구민이 관심을 두는 분야와 각 분야에서 가장 기대하는 사업 등을 묻는 내용으로 구성됐다.구는 조사 결과를 종합적으로 분석해 주민 관심도가 높은 분야와 사업을 파악할 예정이다. 이를 민선9기 공약사업 실행계획 수립과 핵심·우선 추진 사업 선정에도 반영한다.김경호 광진구청장은 “민선9기 공약은 구민과의 약속인 만큼 정책을 구체화하는 과정에서도 주민의 목소리를 충실히 반영하는 것이 중요하다”며 “구민들의 의견을 바탕으로 우선순위를 면밀히 정하고 생활 속에서 변화를 체감할 수 있는 공약사업을 속도감 있게 추진하겠다”고 말했다.。     स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में आज राष्‍ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। अलग-अलग आयोजन हो रहे हैं। क्‍या आप जानते हैं कि राष्‍ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्‍त को ही क्‍यों मनाया जाता है? दरअसल इसी दिन हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्‍यानचंद का जन्‍म हुआ था। ध्यान सिंह का जन्म 29 अगस्‍त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था।,उनके दोस्त उन्‍हें चंद कहकर बुला‍ते थे। इसका कारण था कि वह ड्यूटी के बाद घंटों चांदनी रात में प्रैक्टिस करते थे। उन्हें हॉकी का जादूगर ही कहा जाता है। उन्होंने अपने करियर में 1000 से अधिक गोल दागे। उन्‍होंने 1928 एम्सटर्डम, 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन में भारत को ओलंपिक खेलों में लगातार तीन गोल्‍ड मेडल जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।,ध्यानचंद ने 16 साल में ब्रिटिश भारतीय सेना ज्‍वॉइन की थी। उनके पिता समेश्वर सिंह ब्रिटिश आर्मी में थे। इस दौरान ध्यानचंद ने हॉकी खेलना शुरू किया। 1922 और 1926 के बीच उन्होंने कई सेना हॉकी टूर्नामेंट और रेजिमेंटल खेलों में हिस्‍सा लिया था। 1928 में हॉकी को पहली बार ओलंपिक में शामिल किया गया।,1928 में हुए ओलंपिक में ध्यान चंद ने डेब्यू किया। ध्यानचंद ने 14 गोल कर भारत को गोल्‍ड मेडल जिताने में अहम भूमिका निभाई। ध्यानचंद ने 1956 में संन्‍यास का एलान किया था। उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। आइए ध्यानचंद से जुड़ी कुछ रोचक बातें जानते हैं।,अपने बेजोड़ स्टिक-वर्क और बॉल कंट्रोल की वजह से मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा। वह गेंद और स्टिक के बीच ऐसे तालमेल बैठाते थे कि देखने वालों को भरोसा ही नहीं होता था। यह उनके अभ्‍यास का नतीजा था।,1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनके खेल से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें जर्मन सेना में शामिल होने का ऑफर दिया। हालांकि उन्होंने हिटलर के इस प्रस्‍ताव को ही ठुकरा दिया था। उन्‍होंने अपने देश को चुना था।,

जादुई स्टिक

नीदरलैंड में अधिकारियों को संदेह था कि ध्‍यानचंद हॉकी स्टिक में चुंबक या गोंद लगाकर खेलते हैं। इससे गेंद चिपक जाती है। ऐसे में उनकी हॉकी स्टिक की तोड़कर जांच भी की गई थी।

आत्मकथा

मेजर ध्‍यानचंदकी आत्मकथा का नाम 'गोल' है। यह 1952 में प्रकाशित हुई थी। इसके लेखक मेजर ध्यानचंद ही थे।

डॉन ब्रैडमैन हुए मुरीद

दिग्‍गज क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन ने मेजर ध्यानचंद के खेल को देखकर कहा था कि वे वैसे ही गोल करते हैं, जैसे क्रिकेट में रन बनाए जाते हैं। यह भी पढ़ें- National Sports Day 2024 पर PM Modi ने मेजर ध्यानचंद को किया याद, PR Sreejesh समेत इन दिग्गजों के ट्वीट भी वायरल。

Current article:http://7vix.zongchaeiwengshuabaisisuofu.sbs/d01wh/tz8.html

Published on:09:12:21


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